शुक्रवार 23 जनवरी 2026 - 16:30
दुश्मन की हार सिपाहियों के बलिदान की वजह से हैं: जनरल मूसवी

हौज़ा / जनरल मूसवी ने पासदार दिवस के अवसर पर कहा है कि सिपाहियों की जानेसारी ( बलिदान) की बदौलत दुश्मन को बुरी तरह हार का सामना करना पड़ा।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , ईरानी सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ, मेजर जनरल सैयद अब्दुर रहीम मूसवी ने कहा है कि सेना और पासदारान-ए-इन्क़िलाब (इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर) पूरी तरह सतर्क, तैयार और ईमान से सराबोर हैं और इस्लामी क्रांति और देश के लिए हर पल मैदान में रहने से गुरेज नहीं किया जाएगा।

यौम-ए-पासदार के अवसर पर पासदारान ए इन्क़ेलाब के प्रमुख जनरल पाकपूर के नाम अपने संदेश में, जनरल मूसवी ने कहा कि 3 शाबान-उल-मुआज़्ज़म, इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के जन्मदिन को इमाम ख़ुमैनी ने "यौम-ए-पासदार" घोषित किया। इस दिन की बरकत से आप सहित पासदारान-ए-इन्क़िलाब के सभी अफ़सरों और सदस्यों को बधाई भेंट करता हूँ।

उन्होंने कहा कि इस्लामी गणतंत्र ईरान और पश्चिमी एशिया में मुसलमानों की सुरक्षा और दुश्मनों की नाकामी में पासदारान-ए-इन्क़ेलाब की भूमिका इतनी स्पष्ट है जिसे दुश्मन भी नहीं छिपा सकता।

इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद इन 47 वर्षों के दौरान पासदारान-ए-इन्क़िलाब ने दुश्मन की साज़िशों, संकटों और फ़ितनों का सफ़ाया करने में सफल भूमिका निभाई है, जिसकी सबसे स्पष्ट मिसाल "बारह दिवसीय युद्ध थी।

जनरल मूसवी ने आगे कहा कि जान हथेली पर रखने वाले सिपाहियों ने अन्य सुरक्षा बलों के साथ मिलकर दुश्मन की हार को यकीनी बनाने में अहम भूमिका निभाई। इमाम ख़ुमैनी के फरमान की रोशनी में अगर ताकतवर पासदारान-ए-इन्क़िलाब न होती तो ईरान का भी नामो-निशान न होता।

उन्होंने कहा कि पासदारान-ए-इन्क़ेलाब और सेना पूरी तरह तैयार, सतर्क और ईमान से सराबोर हैं। देश और इस्लामी क्रांति को ज़रूरत पड़ने पर हर लम्हा मैदान में रहने से गुरेज नहीं किया जाएगा।

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