गुरुवार 12 मार्च 2026 - 11:32
यौम कुद्स;इसराइली अत्याचारों पर आलमें इस्लाम की चुप्पी विचारणीयः अल्लामा हसन ज़फर नकवी

हौज़ा / आयतुल्लाह सैयद मुज्तबा खामेनेई के ईरान के सुप्रीम लीडर चुने जाने पर आज एक बार फिर अमेरिका और इसराइल पर कहर टूट पड़ा है। दुनिया भर में फैले खुमैनी और खामेनेई के इंकेलाबी बेटे मजलिस-ए-खुबरेगान के फैसले का स्वागत करते हैं। फिलस्तीनियों पर होने वाले अत्याचारों पर चुप नहीं रह सकते। इमाम खुमैनी (रह) ने रमजान के आखिरी जुमआ को यौम अल-कुद्स का नाम दिया था।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , मशहूर आलिम-ए-दीन अल्लामा सैयद हसन ज़फर नकवी ने यौम अल-कुद्स के मौके पर कहा कि इमाम खुमैनी (रह) ने रमजान के आखिरी जुमआ को अंतरराष्ट्रीय कुद्स दिवस का नाम देकर फिलस्तीनी आंदोलन को हमेशा के लिए जिंदा कर दिया है।

फिलस्तीन, फिलस्तीनियों की मातृभूमि है और इसराइल एक नाजायज सियोनी राज्य है। मस्जिद-ए-अक्सा और बैत-उल-मुकद्दस की अन्य इबादतगाहों पर हमले मुसलमानों की गैरत-ए-ईमानी के लिए चुनौती हैं।

अल्लामा हसन ज़फर नकवी ने कहा कि इसराइली अत्याचारों और दहशतगर्दी पर उम्मा की चुप्पी विचारणीय है। हम फिलस्तीन और फिलस्तीनी मुसलमानों पर होने वाले हमलों और जुल्म-ओ-तशद्दुद पर चुप नहीं रह सकते। दुनिया की कौमें जान लें कि बैतुल-मुकद्दस हमारी रेड लाइन है।

अल्लामा हसन ज़फर नकवी ने सैयद मुजतबा खामेनेई के ईरान के सुप्रीम लीडर चुने जाने पर कहा कि आज एक बार फिर अमेरिका और इसराइल पर कहर टूट पड़ा है। अली (अ) के बाद उनका बेटा मुजतबा खामेनेई मैदान में आ गया है। दुनिया भर में फैले खुमैनी और खामेनेई के इंकलाबी बेटे मजलिस-ए-खुब्रेगान के फैसले का स्वागत करते हुए वली-ए-फकीह आयतुल्लाह सैयद मुजतबा खामेनेई के चुनाव पर पूरी उम्मत को आखिरी फतह की खुशखबरी देते हैं।

उन्होंने कहा कि यह चुनाव इस्लाम और मुसलमानों की फतह का ढिंढोरा है, दुनिया भर के मजलूम एकजुट रहें और अमेरिका और इसराइल के विनाश का नज़ारा देखने के लिए तैयार रहें। उन्होंने यौम अल-कुद्स के मौके पर कहा कि फिलस्तीन को खत्म किया जा रहा है। हजारों मासूम बच्चे, औरतें, बुजुर्ग खून में तड़पाए गए, अस्पतालों पर बमबारी करके वहाँ इलाजरत मरीजों तक को मौत के घाट उतार दिया गया, लेकिन नाम-निहाद इंसानदोस्त मगरिब इसराइल की हर तरह की मदद के लिए उसके साथ खड़ा हो गया।

उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया का फिलस्तीन के मजलूमों को अकेला छोड़ देना और इसराइली दरिंदों के सामने फेंक देना ऐसा जुर्म है जो कभी माफ नहीं किया जाएगा। मुस्लिम मुल्क फिलस्तीनियों का साथ देने के बजाय अमेरिका और इसराइल के हुक्म पर अमल कर रहे हैं।

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