हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,कुद्स दिवस के मौके पर हल्दौर , गांव छजुपुरा सादात में एलिया एजुकेशनल वैल्फ़ेयर सोसाइटी के बैनर तले एक रैली का आयोजन किया गया रैली में शरीक लोग फ़िलिस्तीन के समर्थन में अपने हाथों में बैनर, तख्तियाँ और शहीदों की तस्वीरें लिए हुए थे, जबकि वे इज़राइली क्रूरता और बर्बर हमलों के ख़िलाफ़ ज़ोरदार नारे लगाएं।
शुक्रवार की नमाज़ के बाद जामा मस्जिद अबुतालिब से शुरू हुआ जुलूस गांव के मुख्य मार्गो से गुज़रते हुए इमाम बाड़ा पहुंचकर समाप्त हुआ।
इस अवसर पर पेश नमाज़ मौलाना मेंहदी अब्बास ज़ैदी ने कहा की “इमाम खुमैनी ने 47 साल पहले इस दिन की नींव रखी थी, ताकि दुनिया को याद दिलाया जा सके कि फ़िलिस्तीन सिर्फ़ एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अंतरात्मा का मामला है।
आज, फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध की गूंज पूरी दुनिया में सुनाई दे रही है, और हर जगह ज़मीर वाले लोग इज़राइल के ख़िलाफ़ खड़े हैं। “अमेरिका और इज़राइल ज़ुल्म के शिकार लोगों के खून के ज़रिए सत्ता हासिल करना चाहते हैं, लेकिन ईमान वाले लोग उनके सामने कभी नहीं झुकेंगे।
यह संघर्ष सिर्फ़ ज़मीन के लिए नहीं है, बल्कि मानवता और ज़ुल्म के शिकार लोगों के अधिकारों के लिए है। हम अपनी आखिरी सांस तक फ़िलिस्तीन के साथ खड़े रहेंगे।
आगे अपने भाषण में उन्होंने कहा कि ‘क़ुद्स दिवस’ रहबरे इंक़लाब इमाम खुमैनी की एक महान विरासत है, जो फ़िलिस्तीनी मुद्दे पर मुसलमानों को एकजुट करती है। उन्होंने कहा, “इस्लामी क्रांति की सफलता के बाद, इमाम खुमैनी वैश्विक अहंकार के खिलाफ खड़े हुए और फिलिस्तीन के स्वतंत्रता आंदोलन को मज़बूत करने के लिए रमज़ान के आखिरी शुक्रवार को ‘कुद्स दिवस’ घोषित किया।
उन्होंने आगे कहा कि इमाम खुमैनी ने “हफ्ता ए वैहदत” की भी शुरुआत की और मुस्लिम जगत की असली ताकत को जगाने के लिए हज के दौरान अहंकार के त्याग (बराअत मिन अल-मुशरिकीन) पर ज़ोर दिया और फिलिस्तीन की जीत के लिए नारे लगाए। जबकि प्रतिभागियों ने फिलिस्तीन की आज़ादी तक अपना संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

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