हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुवाद समूह की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय तालिबों ने क़ुम शहर में एक सेवा शिविर लगाकर, एक जन-आंदोलनकारी और क्रांतिकारी कदम उठाते हुए, लोगों और जनसेवकों की सेवा की है। यह शिविर, जो लगभग दस दिनों से लगा हुआ है, गैर-ईरानी तालिबों के बीच एकजुटता और क्रांतिकारी जज्बे का प्रतीक बन गया है।
इस आध्यात्मिक आंदोलन के आयोजकों ने घोषणा की कि इस सेवा केंद्र का उद्देश्य लोगों और प्रतिरोध मोर्चे के समर्थकों की मेज़बानी करना, वर्तमान संकटपूर्ण स्थिति में सहानुभूति की भावना को मजबूत करना, और शहीदों तथा इस्लामी क्रांति के नेतृत्व के आदर्शों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करना है। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह कार्यक्रम सत्य मोर्चे की अंतिम विजय तक जारी रहेगा।

भारतीय छात्रो ने एक बयान जारी करके संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल शासन की शत्रुतापूर्ण कार्रवाइयों की कड़ी निंदा की और इसे दुनिया की मज़लूम जनता के खिलाफ ज़ुल्म और अहंकार का प्रतीक बताया। इस बयान में कहा गया है कि स्वतंत्र राष्ट्र इन अपराधों के सामने कभी चुप नहीं बैठेंगे और मज़लूमों के साथ खड़े रहेंगे।
इस बयान में आगे जोर देकर कहा गया है कि भारतीय छात्र हर स्थिति में ईरानी जनता के साथ रहेंगे और इस्लामी क्रांति के आदर्शों की रक्षा करेंगे। उन्होंने क्षेत्र की संकटपूर्ण स्थिति का उल्लेख करते हुए ईरान की जनता के प्रति अपना समर्थन व्यक्त किया और यह भी बताया कि यह साथ केवल एक धार्मिक कर्तव्य नहीं, बल्कि एक मानवीय जिम्मेदारी है।
कुछ भारतीय छात्रो ने हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के रिपोर्टर से बातचीत में कहा: "हम स्वयं को इस्लामिक उम्माह का हिस्सा मानते हैं, और इस रास्ते में, इस्लामी गणतंत्र ईरान का समर्थन करना हक और इंसाफ के समर्थन के समान है। आज अमेरिका और इज़राइल दुनिया में ज़ुल्म और अत्याचार के प्रतीक हैं, और उनके खिलाफ खड़ा होना सभी स्वतंत्र लोगों का कर्तव्य है। हम भारत की धरती से आए हैं, लेकिन हमारे दिल ईरान की जनता और दुनिया के सभी मज़लूमों के साथ हैं। हम हर स्थिति में ईरानी जनता के साथ खड़े रहेंगे और इस रास्ते को जारी रखेंगे।"

अंत में, भारतीय छात्रो ने दुनिया के सभी मुसलमानों और स्वतंत्र लोगों से अपील की कि वे एकता और सहयोग बनाए रखते हुए ज़ुल्म के खिलाफ खड़े हों और मज़लूम जनता का समर्थन करें।
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