सोमवार 20 अप्रैल 2026 - 12:00
बाब अल-मंदब को अगर बंद कर दिया तो जिन्न और इंसान भी उसे नहीं खोल सकेंगे : अंसारुल्लाह यमन

हौज़ा / यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के वरिष्ठ नेता और उपविदेश मंत्री हुसैन अलअज्ज़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,बाब अलमंदब को अगर बंद कर दिया तो जिन्न और इंसान भी उसे नहीं खोल सकेंगे।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,यमन के अंसारुल्लाह आंदोलन के वरिष्ठ नेता और उपविदेश मंत्री हुसैन अलअज्ज़ी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा,खुदा की मदद से अगर सना यह फैसला कर ले कि बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य को बंद कर दिया जाए, तो इंसान और जिन्न कोई भी उसे दोबारा खोलने में पूरी तरह असमर्थ होगा।

इसलिए बेहतर है कि ट्रंप और उसके साथ देने वाली दुनिया तुरंत उन सभी कदमों और नीतियों को समाप्त करें जो शांति में बाधा बन रही हैं, और हमारे लोगों तथा हमारी उम्मत के अधिकारों का पूरा सम्मान करें।

अंसारुल्लाह (हौसी) आंदोलन के वरिष्ठ नेता ने काफ़ी सख्त और चेतावनी भरे अंदाज़ में अपनी बात रखी है। उन्होंने साफ़ तौर पर कहा कि अगर यमन की राजधानी सना की सरकार यह फैसला लेती है कि बाब-अल-मंदब जलडमरूमध्य को बंद करना है, तो दुनिया की कोई ताकत उसे दोबारा खोल नहीं पाएगी।इंस और जिन्न” वाला जुमला उन्होंने अपने बयान की तीव्रता और आत्मविश्वास को दर्शाने के लिए इस्तेमाल किया है।

अल-अज्ज़ी के इस बयान को मौजूदा क्षेत्रीय तनाव और खास तौर पर अमेरिका की नीतियों के संदर्भ में देखा जा रहा है। उन्होंने सीधे तौर पर डोनाल्ड ट्रंप और उसके सहयोगियों को निशाना बनाते हुए कहा कि अगर वे सच में शांति चाहते हैं, तो उन्हें अपनी उन नीतियों और कदमों को बंद करना चाहिए जो संघर्ष को बढ़ावा दे रहा हैं। साथ ही उन्होंने यह भी जोर दिया कि यमन और व्यापक मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए।

विशेषज्ञों के मुताबिक, इस तरह के बयान एक तरह की रणनीतिक चेतावनी भी हो सकते हैं, जिनका उद्देश्य दबाव बनाना और अंतरराष्ट्रीय समुदाय को संदेश देना होता है कि यमन के पास अहम समुद्री मार्गों को प्रभावित करने की क्षमता है।

बता दें कि, बाब-अल-मंदब दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी और आगे हिंद महासागर से जोड़ता है। इस रास्ते से बड़ी मात्रा में अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की सप्लाई गुजरती है।

इसलिए अगर यह जलडमरूमध्य बंद होता है, तो इसका असर सिर्फ़ क्षेत्रीय नहीं बल्कि वैश्विक स्तर पर पड़ेगा खासकर यूरोप, एशिया और मध्य पूर्व के बीच होने वाले व्यापार पर।

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