हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , बिज़नेस स्टैंडर्ड अखबार ने रिपोर्ट दी है कि भारत सरकार अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए चाबहार बंदरगाह विकास कंपनी में अपनी हिस्सेदारी एक ईरानी कंपनी को बेचना चाहती है, क्योंकि वॉशिंगटन से मिली छूट समाप्त हो चुकी है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, नई दिल्ली एक अस्थायी विकल्प पर भी विचार कर रही है, जिसके तहत प्रतिबंधों की अवधि के दौरान एक ईरानी ऑपरेटर बंदरगाह का प्रबंधन करेगा, और उसके बाद परिचालन प्रबंधन भारत को वापस लौट सकता है।
भारत के निवेश से ईरान का चाबहार बंदरगाह विकास समझौता वर्ष 2016 में तब हस्ताक्षरित हुआ था, जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान का दौरा किया था। भारत का उद्देश्य चाबहार बंदरगाह को उत्तरी-दक्षिणी अंतर्राष्ट्रीय परिवहन गलियारे (INSTC) के तहत एक प्रमुख पारगमन केंद्र बनाना है, ताकि मध्य एशियाई देशों और रूस तक पहुँचा जा सके।
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