हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, ईरान पर थोपे गए युद्ध के खिलाफ़ दुनिया भर में माहौल बना हुआ है और लोग अमेरिका और इस्राइल की निंदा कर रहे हैं। ईरान के उच्च नेता आयतुल्लाह सैयद अली ख़ामेनेई और अन्य उलेमा, अधिकारियों एवं सैन्य अधिकारियों को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। दिल्ली में भी एक सम्मेलन में बातिल ताक़तों के सामने सिर न झुकाने वालों और शहादत को स्वीकार करने वालों को श्रद्धांजलि दी गई।
'ऑल इंडिया अमीने इंक़लाब कांफ्रेंस' शीर्षक से इस सम्मेलन का आयोजन ऑल इंडिया शिया अलिम काउंसिल द्वारा किया गया था। सम्मेलन को संबोधित करते हुए उलेमा और ज़ाकिरीन ने कहा कि ईरान के उच्च नेता और अन्य ने सत्य के मार्ग में जान कुर्बान करके एक बार फिर कर्बला को ज़िंदा कर दिया है। आयतुल्लाह ख़ामेनेई की शहादत ने दुनिया भर को तशय्यु के सिलसिले में अध्ययन करने पर मजबूर कर दिया है। बड़ी संख्या में लोग शियावाद की ओर आकर्षित हो रहे हैं।
सम्मेलन में इस बात पर ज़ोर दिया गया कि अब शिया उलेमा और ज़ाकिरीन की ज़िम्मेदारी है कि वे अपने भाषणों के माध्यम से उस चिराग़ को और अधिक ताकत दें जिसे ईरान के शहीदों ने अपने ख़ून से रोशन किया है।
सम्मेलन में मौलाना मुहम्मद रज़ा ग़रवी, मौलाना जलाल हैदर नक़वी, मौलाना जाफ़र अली रज़वी, मौलाना जुनैन असगर मौलाई, मौलाना सफ़ी हैदर ज़ैदी, मौलाना तहज़ीबुल हसन, मौलाना इमरान रज़ा और मौलाना अहमद अली आबिदी, मौलाना ज़ामिन जाफ़री सहित अन्य उलेमा-ए-किराम ने भी भाषण दिए। दिल्ली के इतिहास की इस बड़ी सफल कांफ्रेंस में देश के नामवर उलेमा और ज़ाकिरीन ने शिरकत की और सत्य के मार्ग में शहीद हुए आयतुल्लाह ख़ामेनेई तथा ईरान के अन्य शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में ईरान के राजदूत डॉ. फ़तेह अली ने विशेष अतिथि के रूप में भाषण दिया।
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