सोमवार 11 मई 2026 - 12:07
उम्मत की हिदयात और रहनुमाई में रसूल (स) की इतरत की बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी है

हौज़ा / आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी ने कहा है कि रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व आलेही की इतरत ए अहलेबैत को क़ुरआन की तफ़सीर और उम्मत के मार्गदर्शन में विशेष स्थान प्राप्त है और "इतरत" तथा "उम्मत" में मूलभूत अंतर मौजूद है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी ने कहा है कि रसूल (स.ल.व.) की इतरत (अहलेबैत) को कुरआन की तफ़सीर और उम्मत के मार्गदर्शन में विशेष स्थान प्राप्त है, और "इतरत" तथा "उम्मत" में मूलभूत अंतर मौजूद है।

आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी ने इमाम रज़ा (अ.स.) के हवाले से कहा कि इतरत अतहार (अ.स.) की एक विशेषता यह है कि "उन पर सदक़ा हराम है, जबकि उम्मत के अन्य लोगों पर सदक़ा जायज़ है।

उन्होंने आयत ""إِنَّ اللّهَ اصْطَفَی آدَمَ......" के प्रकाश में कहा कि जिस प्रकार अल्लाह ने आल-ए इब्राहीम और आल-ए इमरान को सारे संसारों पर प्राथमिकता दी, उसी प्रकार आल-ए मुहम्मद (स.ल.) को भी यह प्राथमिकता प्राप्त है, जिसे आयत-ए तत्हीर और आयत-ए मुबाहिला में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

हदीस-ए सकलैन (दो भारी चीज़ों) का हवाला देते हुए उनका कहना था कि रसूलुल्लाह (स.ल.) ने फरमाया,मैं तुम्हारे बीच दो चीज़ें छोड़े जा रहा हूँ: किताबुल्लाह (कुरआन) और मेरी इतरत"यह साबित करता है की इमाम मासूमीन (अ.स.) ही इतरत के सदस्य और उम्मत के मार्गदर्शक (हादी) हैं।

आयतुल्लाह दरी नजफ़ाबादी ने सूरह तौबा की आयत 60 का हवाला देते हुए कहा कि ज़कात और सदक़ात का मूल उपभोग गरीबों और मिस्कीनों के लिए है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिस प्रकार सादात के गरीबों को सहम-ए सादात और खुम्स से संभाला जाता है, उसी प्रकार गैर-सादात गरीबों के लिए ज़कात अमवाल और ज़कात-ए फित्रह के माध्यम से उनकी आवश्यकताओं को पूरा करने का प्रबंध किया जाना चाहिए।

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