हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , 16 मई "यौमे मुर्दाबाद अमेरिका व इज़राइल" वास्तव में वैश्विक अत्याचार, सियोनिज़्म और बर्बरता के खिलाफ घृणा व्यक्त करने का दिन है। यह दिन हमें शहीद नेता अल्लामा आरिफ हुसैन अल-हुसैनी के उस ऐतिहासिक संदेश की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने उम्मते मुस्लिमा को अमेरिका और इज़राइल की साजिशों, आक्रामकता और इस्लाम विरोधी नीतियों के खिलाफ जागृत और एकजुट रहने की शिक्षा दी।
14 मई 1948 को फिलिस्तीन की पीड़ित धरती पर अवैध सियोनी इज़राइल राज्य की स्थापना की गई, और 16 मई को अमेरिका ने उसे मान्यता देकर न केवल फिलिस्तीनी जनता के अधिकारों पर हमला किया, बल्कि पूरी उम्मते मुस्लिमा की भावनाओं को ठेस पहुंचाई। आज भी फिलिस्तीन, ग़ाज़ा, लेबनान, सीरिया, इराक और अन्य मुस्लिम क्षेत्र शक्तियों की साजिशों और आक्रामकता का शिकार हैं।
इमाम ज़ैनुल आबिदीन इंस्टीट्यूट ऑफ तालीमाते क़ुरआन व अहलेबैत, मेहराबपुर सिंध, इस अवसर पर घोषणा करता है कि: हम हर प्रकार के अत्याचार, उपनिवेशवाद और सियोनिज़्म के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करते रहेंगे।
हम फिलिस्तीन की पीड़ित जनता, प्रतिरोध के शहीदों, और पहली क़िबला बैतुल मुकद्दस की आज़ादी के संघर्ष का पूर्ण समर्थन करते हैं। हम मुहम्मदी इस्लाम, विलायत की विचारधारा, उम्मत के एकता और इमाम ए ज़माना की सहायता के मार्ग पर स्थिर रहने का संकल्प करते हैं।
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