हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान के नमाज़-ए-जुमा के ख़ुत्बे से खिताब करते हुए हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन अबूतुराबी फर्द ने कहा कि इस्लामी समाज की तरक्की, स्थिरता और शेष रहने के लिए रक्षात्मक ताकत बुनियादी अहमियत रखती है, और क़ुरआने करीम उम्मत-ए-मुस्लिमा को राजनीतिक, सैन्य और रक्षात्मक कुव्वत के उच्चतम दर्जे तक पहुँचने की प्रेरणा करता है।
उन्होंने कहा कि रक्षात्मक क्षमता में ठहराव या सुस्ती की कोई गुंजाइश नहीं है, बल्कि ज़मीनी, हवाई और समुद्री हर स्तर पर ताकत में इज़ाफ़ा ज़रूरी है ताकि दुश्मन के इरादों को रोका जा सके। उनके अनुसार इमाम खुमैनी (र) ने ईरान में इस्लामी निज़ाम की बुनियाद रखी, जबकि आयतुल्लाह खामेनई ने पिछली चार दहाइयों में इस निज़ाम को स्थिरता, रक्षात्मक कुव्वत और जनता का समर्थन दिया।
अबूतुराबी फर्द ने कहा कि अमेरिका और इज़राइल की थोपी गई जंग ने दरअसल ईरान को वैश्विक स्तर पर एक नई ताकत के रूप में परिचित कराया है। उन्होंने दावा किया कि पहली बार अमेरिका की सैन्य रणनीति और ताकत का फॉर्मूला ईरान के मुक़ाबले में नाकाम हुआ और वॉशिंगटन अपने लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रहा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका की पॉलिसी हमेशा दबाव, पाबंदियों, राजनयिक तन्हाई, मनोवैज्ञानिक युद्ध और सैन्य आक्रामकता के ज़रिए अपना वर्चस्व क़ायम रखने की रही है, मगर ईरान ने इन तमाम चरणों का सामना करते हुए अपनी मुक़ावमती कुव्वत में इज़ाफ़ा किया है।
खतीब-ए-नमाज़-ए-जुमा तेहरान के अनुसार मौजूदा जंग में अमेरिका को तीन मोर्चों पर शिकस्त हुई। उनके अनुसार पहला मोर्चा मैदान-ए-जंग है, जहाँ ईरान ने अमेरिकी और सहयोगी अहदाफ़ को मुसलसल निशाना बनाया। दूसरा मोर्चा सियासत है, जहाँ अमेरिकी क़यादत की रणनीति पर खुद पश्चिमी हलकों में सवालात उठ रहे हैं। तीसरा मोर्चा जनता का समर्थन है, जहाँ ईरान के अंदर आवामी मौजूदगी और अमेरिका के अंदर जंग के खिलाफ़ प्रदर्शन ने नई सूरत-ए-हाल पैदा कर दी है।
उन्होंने आगे कहा कि ईरान सिर्फ अपनी रक्षा के लिए नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की इज़्ज़त, संप्रभुता और प्रतिरोध अक्ष के संरक्षण के लिए खड़ा है। उनके अनुसार क्षेत्र का भविष्य मैदान में होने वाली प्रगति से तय होगा, और ईरान अत्याचार और साम्राज्यवाद के खिलाफ़ अपनी मुक़ावमत जारी रखेगा।
आपकी टिप्पणी