हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार ,एक रिपोर्ट के अनुसार नेतन्याहू ने केवल अमीराती अधिकारियों से ही नहीं, बल्कि खाड़ी क्षेत्र की कई अन्य राजनीतिक हस्तियों से भी बंद कमरे में मुलाकातें कीं।
यह ऐसे समय में हुआ जब ग़ाज़ा युद्ध और क्षेत्रीय संकट को लेकर अरब जनता में पहले ही इज़रायल के प्रति गहरा ग़ुस्सा मौजूद है। ऐसे माहौल में यूएई नेतृत्व की यह नज़दीकी अरब दुनिया में सवालों के घेरे में आ गई है।
मआरिव के मुताबिक यात्रा समाप्त होने के बाद दोनों पक्षों ने आपसी सहमति से तय किया था कि मुलाकातों की तस्वीरें और आधिकारिक बयान तुरंत जारी नहीं किए जाएंगे, क्योंकि मौजूदा हालात में इसका खुलासा राजनीतिक प्रतिक्रिया को और भड़का सकता था। यह फैसला नेतन्याहू कार्यालय और यूएई के युवराज के दफ़्तर की ओर से लिया गया था। लेकिन जानकारी लीक होने के बाद अब दोनों पक्ष आलोचनाओं का सामना कर रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि एक तरफ़ अरब देशों में फ़िलिस्तीन के समर्थन में व्यापक प्रदर्शन हो रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ़ इज़रायली नेतृत्व के साथ गुप्त संपर्क यह दर्शाते हैं कि कुछ खाड़ी सरकारें जनता की भावनाओं के विपरीत नीतियाँ अपना रही हैं। आलोचकों का आरोप है कि यूएई नेतृत्व ने फ़िलिस्तीनी मुद्दे और अरब जनभावनाओं को नज़रअंदाज़ करते हुए इज़रायल के साथ संबंध मज़बूत करने को प्राथमिकता दी है।
उधर इज़रायल के भीतर भी इस यात्रा को लेकर बहस छिड़ गई है। विपक्षी हलकों का मानना है कि नेतन्याहू अपनी अंतरराष्ट्रीय अलग-थलग स्थिति को कम करने और क्षेत्रीय समर्थन जुटाने के लिए गुप्त कूटनीतिक प्रयासों में लगे हुए हैं। हालांकि इस पूरे मामले ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इज़रायल और कुछ अरब देशों के बीच बढ़ते रिश्ते अब भी बेहद संवेदनशील और विवादित मुद्दा बने हुए हैं।
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