मंगलवार 30 जून 2026 - 08:33
मुबल्लेग़ीन की महत्वपूर्ण ज़िम्मेदारी जनता को मितव्ययिता और इसराफ़ से बचने पर ज़ोर देना है

हौज़ा ए इल्मिया के प्रबंधक ने अपने संदेश में वर्तमान जिहाद के महत्वपूर्ण पहलुओं में "संसाधनों के प्रबंधन" और "उपभोग में ज़िम्मेदाराना रवैया" की संस्कृति को बढ़ावा देना बताया और उपदेशकों व मुबल्लेग़ीन को यह ज़िम्मेदारी सौंपी कि वे जनता के लिए मितव्ययिता और इसराफ़ से बचने की महत्ता और आवश्यकता को स्पष्ट करें।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हौज़ा ए इल्मिया के प्रबंधक आयतुल्लाह अली रज़ा अराफ़ी ने विद्वानों, वक्ताओं और मुबल्लेग़ीन के नाम एक संदेश भेजा है, जिसका पाठ इस प्रकार है:

बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्राहीम

माननीय विद्वानों, आदरणीय वक्ताओं और सम्मानित प्रचारकों

सलामुन अलैकुम व रहमतुल्लाह 

हम मोहर्रम उल हराम के महीने में हैं, जो इलाही मूल्यों के पुनर्जीवन और अहलेबैत (अ) के गहन ज्ञान के प्रस्तुतीकरण का महीना है। मोहर्रम उल हराम अंतर्दृष्टि बढ़ाने और "धार्मिक तर्कशीलता" तथा "इस्लामी समुदाय के हितों" के बीच संबंध स्थापित करने का महीना है।

आज जब अहंकारी मोर्चा, जिसकी अगुवाई अमेरिका और ज़ायोनी सरकार कर रही है, ने ईरान की गौरवशाली जनता के इरादे को एक व्यापक और संयुक्त युद्ध के ज़रिए निशाना बनाया है, विद्वानों की ज़िम्मेदारी "जिहादे तबयीन" और "मैदान में संघर्ष" के पहलुओं को स्पष्ट करने में दोगुनी हो गई है।

आज के जिहाद के महत्वपूर्ण पहलुओं में "संसाधनों के प्रबंधन" और "उपभोग में जिम्मेदाराना रवैया" की संस्कृति को बढ़ावा देना है। मितव्ययिता और फ़ुज़ूलखर्ची से बचने का अर्थ बुद्धिमानी से उपयोग करना और मर्यादा से बाहर न जाना है। पवित्र क़ुरआन ने हमें सबसे कड़े शब्दों में इसराफ़ और फुजूलखर्ची से बचने पर ज़ोर दिया है: إِنَّ الْمُبَذِّرِینَ کَانُوا إِخْوَانَ الشَّیَاطِینِ (सूर ए इसरा / 27)

इस रास्ते में हमारा व्यावहारिक आदर्श सदैव क्रांति के शहीद नेता हज़रत आयतुल्लाह ख़ामनेई (र) की दूरदर्शी जीवनशैली रही है, जो हमेशा "फ़ुज़ूलखर्ची रहित जीवन-शैली" और "देश के संसाधनों से अधिकतम लाभ उठाने" पर विशेष ज़ोर देते थे।

निस्संदेह आज भी हज़रत आयतुल्लाह सय्यद मुजतबा ख़ामनेई (द) इस्लामी व्यवस्था के नेता के रूप में हमसे उम्मीद रखते हैं कि क्रांतिकारी समाज संतोष की संस्कृति और उपभोग के प्रतिरूप में सुधार पर आधारित होकर, दुश्मन को आर्थिक युद्ध के लक्ष्यों को प्राप्त करने में विफल कर दे।

आपसे एक सॉफ्ट वॉर के कमांडरों तथा मिम्बर और मेहराब के रक्षकों के रूप में अपेक्षा है कि अपनी भावपूर्ण शोक सभाओं में अहलेबैत (अ) के नूरानी कलाम से लाभ उठाते हुए निम्नलिखित तीन महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर विशेष ध्यान दें और उनके बारे में व्याख्या एवं स्पष्टीकरण करें:

1- पानी के उपभोग का प्रबंधन: पानी अल्लाह की अमानत और जीवन का स्रोत है। वर्तमान परिस्थितियों में इस जीवनदायी पदार्थ में मितव्ययिता "भलाई और धर्मपरायणता में सहयोग" का व्यावहारिक उदाहरण है।

2- ऊर्जा के उपभोग का प्रबंधन: ऊर्जा आर्थिक शक्ति और देश की राष्ट्रीय सुरक्षा का स्तंभ है। बिजली और ईंधन का सर्वोत्तम उपयोग, स्वतंत्रता के नारे पर लब्बैक कहना और दुश्मन के आर्थिक युद्ध का मुकाबला करना है। ऊर्जा की बर्बादी से बचने के बारे में जागरूकता प्रदान करना आप प्रचारकों की ज़िम्मेदारियों में से है।

3- प्लास्टिक के उपभोग का प्रबंधन: पर्यावरणीय प्रदूषण धरती में फसाद फैलाने के उदाहरणों में से है। पर्यावरण-अनुकूल जीवन-शैली को बढ़ावा देना और स्वच्छ तरीकों को प्रचलित करना, समाज के स्वास्थ्य की रक्षा और आने वाली पीढ़ियों का हक अदा करने के उदाहरणों में से है।

सम्मानित मुबल्लेग़ीन, मोहर्रम और सफ़रे हुसैनी (अ) के दिनों में कार्यक्रमों और शोक सभाओं के दौरान जनता को "सामूहिक भलाई" और "राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा" के लिए प्रोत्साहित करें। निस्संदेह, इन तीन क्षेत्रों में सार्वजनिक मितव्ययिता राष्ट्रीय सुरक्षा की गारंटी और हमारे समाज की ईमानी दृढ़ता का प्रतीक है।

आशा है कि हज़रत बक़ियतुल्लाह अल-आज़म (अ) के अनुग्रह और करुणा, तथा आशूरा व अरबईन के मकतब से लाभ उठाने के माध्यम से, हुसैनी मातम का यह मौसम ईरान की बहादुर और विजयी जनता की भौतिक एवं आध्यात्मिक उन्नति और प्रगति का कारण बनेगा।

अली रज़ा अराफ़ी
प्रबंधक, हौज़ा ए इल्मिया

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