शनिवार 15 अगस्त 2026 - 16:19
आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (AI) केवल एक उपकरण और माध्यम है, क़ुरआन को समझने का काम ए आई के हवाले नहीं किया जा सकता!

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन इब्राहीम इब्राहीमी ने आधुनिक तकनीकों के बारे में रणनीतिक दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर ज़ोर देते हुए आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (AI) को वर्तमान युग में बदलाव लाने वाले सबसे महत्वपूर्ण साधनों में से एक बताया और कहा कि क़ुरआने करीम के क्षेत्र में इस तकनीक का इस्तेमाल एक उद्देश्यपूर्ण, वैज्ञानिक और देश के क़ुरआनी समाज की वास्तविक आवश्यकताओं पर आधारित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, क़ुरआन और मानविकी में उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के संपर्क केंद्र के प्रमुख हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन इब्राहीम इब्राहीमी ने क़ुरआनी उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान की विकास समिति के आधुनिक तकनीकों और आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (AI) कार्य समूह की आयोजित बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि क़ुरआन को समझने का काम आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (AI) के हवाले नहीं किया जा सकता।

उन्होंने क़ुरआनी संस्कृति की विकास परिषद की ओर से सौंपी गई ज़िम्मेदारी के अंतर-संस्थागत स्वरूप की ओर संकेत करते हुए कहा कि क़ुरआनी गतिविधियों के क्षेत्र में आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (AI) का विषय केवल एक अनुसंधान या तकनीकी परियोजना नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय और अंतर-संस्थागत ज़िम्मेदारी है, जिसके लिए देश के सभी संस्थानों, विश्वविद्यालयों, अनुसंधान केंद्रों और क़ुरआनी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी आवश्यक है।

क़ुरआन और मानविकी में उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान के संपर्क केंद्र के प्रमुख ने कहा कि पिछले वर्षों में आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (AI) को अधिकतर शिक्षा और अनुसंधान के लिए एक सहायक साधन माना जाता था, लेकिन आज हमें अपना दृष्टिकोण व्यापक करते हुए आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (AI) को क़ुरआनी अध्ययन और गतिविधियों में बदलाव के महत्वपूर्ण प्रेरकों में से एक के रूप में देखना चाहिए।

उन्होंने कहा कि अनुसंधान, शिक्षा, अंतरराष्ट्रीय और क़ुरआनी मानविकी के कार्य समूहों को इस तकनीक के साथ तालमेल रखते हुए इसकी क्षमताओं के सही विकास और प्रभावी उपयोग के लिए उपयुक्त वातावरण उपलब्ध कराना चाहिए।

हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन इब्राहीमी ने तकनीकी साधनों और वह्यानी ग्रंथों को समझने की प्रक्रिया के बीच सीमाओं को स्पष्ट करते हुए कहा कि हमारा उद्देश्य क़ुरआने करीम को समझने का काम आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस के हवाले करना नहीं है। क़ुरआन को समझना ज्ञान, इज्तिहाद, तफ़्सीर और विद्वतापूर्ण समझ पर आधारित कार्य है और आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (AI) इस क्षेत्र में मुफस्सिरों, क़ुरआन के विशेषज्ञ शोधकर्ताओं और विचारकों का विकल्प नहीं बन सकती।

उन्होंने आगे कहा कि हमारा उद्देश्य इस तकनीक को एक प्रभावी सहायक साधन के रूप में इस्तेमाल करना है, ताकि क़ुरआने करीम की बेहतर समझ, क़ुरआनी अनुसंधान के विस्तार, विद्वतापूर्ण स्रोतों तक आसान पहुँच और क़ुरआनी शिक्षाओं की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायता मिल सके।

उल्लेखनीय है कि इस बैठक में ईरान की आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (AI) एसोसिएशन के प्रमुख डॉ. मुहम्मद हादी ज़ाहेदी, विज्ञान, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अनुसंधान मामलों के महानिदेशक डॉ. समदनज़ाद इब्राहीमी, क़ुरआनी विकास केंद्र के उपाध्यक्ष हमीद बाक़री, आर्टिफ़िशियल इंटेलीजेंस (AI) समूह की प्रमुख ज़हरा मुआज़्ज़ी और कार्य समूह के अन्य सदस्यों ने भाग लिया।

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