हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, क़ुम में आयोजित इस्लामी क्रांति के शहीद सर्वोच्च नेता (र) हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनेई (र) की स्मृति सभा को संबोधित करते हुए हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन मुहम्मद हादी हिदायत ने अपने भाषण में पवित्र क़ुरआन की अनेक आयतों और अहलेबैत (अ) की रिवायतों के आधार पर शहीदों के रक्त की महानता तथा उसके बदले की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अल्लाह के मार्ग में बहाया गया रक्त कभी व्यर्थ नहीं जाता, बल्कि यही रक्त राष्ट्रों के जीवन और सम्मान की गारंटी बनता है।
हुज्जतुल इस्लाम मुहम्मद हादी हिदायत ने ज़ियारत-ए-आशूरा का उल्लेख करते हुए कहा कि इमाम हुसैन (अ) के रक्त का बदला लेने का संदेश हर युग के ईमान वालों के लिए एक जीवंत शिक्षा है, और इसी विचार ने हमेशा अत्याचार और अहंकारी शक्तियों के विरुद्ध प्रतिरोध को मज़बूती प्रदान की है।

उन्होंने इस्लामी संघर्ष के योद्धा नवाब सफ़वी के संघर्ष का उल्लेख करते हुए कहा कि इस्लामी क्रांति के इतिहास में सच्चे और ईमानदार मुजाहिदों ने अपने रक्त से सत्य और असत्य के बीच स्पष्ट रेखा खींच दी, जिसके फल आज भी इस्लामी उम्मत को प्राप्त हो रहे हैं।
वक्ता ने शहीद सर्वोच्च नेता (र) के प्रमुख गुणों का उल्लेख करते हुए कहा कि वे दृढ़ और अटल संकल्प वाले, निरंतर कार्यक्षेत्र में सक्रिय रहने वाले, ज्ञान और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार के अग्रदूत, विद्वानों के समर्थक तथा शहीदों और अनाथों के प्रति विशेष स्नेह और लगाव रखने वाले महान व्यक्तित्व थे, जिनका पूरा जीवन इस्लाम, इस्लामी क्रांति और मुस्लिम उम्मत की सेवा में समर्पित था।

उन्होंने कहा कि शहीद सर्वोच्च नेता (र) का जीवनचरित्र नई पीढ़ी के लिए सर्वोत्तम आदर्श है, और मुस्लिम उम्मत को चाहिए कि वह उनके विचारों, दूरदृष्टि, दृढ़ता और संघर्षशील भावना को अपना आदर्श बनाए।
उल्लेखनीय है कि इस शोक एवं श्रद्धांजलि सभा में पाकिस्तान के क़ायद-ए-मिल्लत-ए-जाफ़रिया हज़रत अल्लामा सय्यद साजिद अली नक़वी सहित बड़ी संख्या में उलेमा, फ़ुज़ला, तलबा और मोमिनीन ने भाग लिया। सभा के प्रतिभागियों ने शहीद सर्वोच्च नेता (र) की सेवाओं को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके मिशन पर दृढ़तापूर्वक कायम रहने का भी संकल्प व्यक्त किया।

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