रविवार 12 जुलाई 2026 - 15:14
जिम्मेदार राष्ट्र!

 शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनेई (र), मशहद मुकद्दस में इमाम अली इब्न मूसा रज़ा अलैहिस्सलाम के पवित्र आंगन में उस समय विश्राम के लिए गए, जब वे अपनी कौम और राष्ट्र को अपने संदेश और कार्यों के माध्यम से जागरूक, एकजुट, दृढ़ संकल्पित और उत्साहित कर चुके थे।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी ! शहीद सुप्रीम लीडर आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनेई (र), मशहद मुकद्दस में इमाम अली इब्न मूसा रज़ा अलैहिस्सलाम के साये में उस समय पहुंचे, जब वे अपने संदेश और कर्मों के द्वारा अपनी कौम और राष्ट्र को जागृत, संगठित और साहस व संकल्प से भर चुके थे।

"कूनू दआतन् लिन्नासि बे-ग़ैरै अल्सेनतेकुम..." (हदीस)

लोगों को अपने कार्यों के द्वारा धर्म की ओर बुलाओ।

आज धार्मिक नेतृत्व अपने ऊंचे और महान स्थान पर खड़ा है और दुनिया के नेताओं के लिए एक दर्पण बन गया है।

ऐसा नेता जो शुद्ध धार्मिक भावना के साथ आया और अपनी कौम से कुछ लिए बिना बहुत कुछ देकर चला गया।

उसने सम्मान, प्रतिष्ठा, स्वतंत्रता, विचारों की आज़ादी, अंतरात्मा की स्वतंत्रता, अल्लाह पर ईमान और यक़ीन, आख़िरत का भय, आत्म-समीक्षा, आपसी सहयोग, भाईचारा और समानता, स्वतंत्रता तथा अपने समय के अत्याचारियों और ज़ालिम शक्तियों, अर्थात अमेरिका और इस्राइल जैसे बुराई के संस्थापकों के सामने अंतिम समय तक डटे रहने और उन्हें तुच्छ व अपमानित समझने का संदेश दिया।

"मेरे जैसा व्यक्ति यज़ीद जैसे व्यक्ति की बैअत नहीं कर सकता।"

आज वे मिट्टी के नीचे आराम कर रहे हैं, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जिन लोगों ने मज़लूमों की आवाज़ को दबाने वालों के विरुद्ध आवाज़ उठाई, दबे-कुचले इंसानों का समर्थन और सहायता की, वह महान व्यक्तित्व अब इस धरती में समा गया है। दुनिया ऐसे साहसी, वीर और बहादुर योद्धाओं को कब प्रस्तुत कर पाएगी?

उनकी शक्ति और सम्मान केवल धर्म की भूमि, विचारधारा की भूमि और ईमान व इस्लाम की भूमि को प्राप्त है। भौतिक शक्तियां ऐसे महान इंसानों को पैदा करने में असमर्थ और निष्फल हैं।

हालांकि न तो वे पहले महान व्यक्ति हैं और न ही अंतिम। बल्कि जिस प्रकाशमय मार्ग पर वे इस महान स्थान तक पहुंचे थे, उस रास्ते में जगह-जगह उनसे भी बढ़कर कई महान व्यक्तित्वों के निशान दिखाई देते हैं। दुनिया केवल अपनी आंखें खोले और अज्ञानता व पक्षपात के चश्मे उतार दे, तो सब कुछ स्पष्ट दिखाई देगा। हां, यह प्रकाशमय मार्ग हुसैन इब्न अली अलैहिस्सलाम का मार्ग है। यह कर्बला वालों का राजमार्ग है, जहां प्रकाश, ज्ञान, समझ, सत्य और असत्य के इनकार के सितारे लगातार चमकते हुए दिखाई देंगे।

हम शहीद सुप्रीम लीडर सय्यद अली हुसैनी ख़ामेनेई (र) की जुदाई में शोकाकुल हैं।

लेकिन न तो हम निराश हैं और न ही शहीद के मार्ग से एक बाल बराबर भी हटने वाली कौम और राष्ट्र हैं। हम इस्लाम के इस महान योद्धा की शहादत पर शोक और संवेदना प्रस्तुत करते हैं तथा इमाम-ए-ज़माना हज़रत हुज्जत (अ) की सेवा में भी श्रद्धांजलि और संवेदना अर्पित करते हैं।

वस्सलाम मअल-इकराम

सय्यद मुशाहिद आलम रिज़वी

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