मंगलवार 22 सितंबर 2026 - 04:14
क़ुम-ए-मुक़द्दसा में भारतीय छात्राओं की हुज्जतुल-इस्लाम शेख़ क़ैस ताई के साथ महत्वपूर्ण इल्मी बैठक

आयतुल्लाह शेख़ मुहम्मद याक़ूबी के ईरान में प्रतिनिधि हुज्जतुल-इस्लाम शेख़ क़ैस ताई और भारतीय छात्रों के प्रतिनिधि मौलाना सैयद अहमद शम्स की मौजूदगी में क़ुम में भारतीय छात्राओं के साथ एक महत्वपूर्ण इल्मी बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में छात्राओं की शिक्षा-दीक्षा और समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर चर्चा हुई।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाह शेख़ मुहम्मद याक़ूबी के ईरान में प्रतिनिधि हुज्जतुल-इस्लाम शेख़ क़ैस ताई और भारतीय छात्रों के प्रतिनिधि मौलाना सैयद अहमद शम्स की मौजूदगी में क़ुम में भारतीय छात्राओं के साथ एक महत्वपूर्ण इल्मी बैठक आयोजित की गई। इसमें छात्राओं की शिक्षा-दीक्षा और समाज के निर्माण में महिलाओं की भूमिका पर बातचीत हुई।

बैठक को संबोधित करते हुए उस्ताद शेख़ क़ैस ताई ने महिलाओं की शिक्षा को एक बेहतर, जागरूक और नेक समाज के निर्माण के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया और हज़रत फ़ातिमा ज़हरा सलामुल्लाह अलैहा की पाकीज़ा सीरत तथा उनके इल्मी और तरबीयती किरदार के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि इस्लाम ने महिलाओं को ज्ञान हासिल करने, अपनी बौद्धिक क्षमताओं को निखारने और समाज के सुधार में प्रभावी भूमिका निभाने का अधिकार दिया है। एक शिक्षित महिला न केवल अपने परिवार की बेहतर तरबीयत कर सकती है, बल्कि समाज में ज्ञान, नैतिकता, धार्मिक जागरूकता और सकारात्मक मूल्यों को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

हुज्जतुल-इस्लाम शेख़ क़ैस ताई ने आगे कहा कि महिलाओं के लिए ज्ञान हासिल करना केवल व्यक्तिगत विकास का साधन नहीं, बल्कि एक धार्मिक, नैतिक और सामाजिक ज़िम्मेदारी भी है। छात्राओं को चाहिए कि वे धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ आधुनिक विषयों में भी दक्षता हासिल करें, ताकि वे अपने समय की समस्याओं को समझकर बुद्धिमत्ता, दूरदृष्टि और इस्लामी मूल्यों की रोशनी में उनका समाधान पेश कर सकें।

उन्होंने छात्राओं को नसीहत की कि वे ज्ञान के साथ-साथ अमल, इख़लास, हया और अच्छे नैतिक गुणों को भी अपनी ज़िंदगी का अनिवार्य हिस्सा बनाएं।

इस अवसर पर मौलाना सैयद अहमद शम्स ने कहा कि एक महिला की शिक्षा केवल एक व्यक्ति की शिक्षा नहीं, बल्कि एक परिवार, एक पीढ़ी और पूरे समाज की शिक्षा है। जब बेटियां ज्ञान और जागरूकता से सुसज्जित होती हैं तो वे अपने परिवारों की बेहतर तरबीयत, समाज के सकारात्मक निर्माण और आने वाली पीढ़ियों के बौद्धिक एवं नैतिक विकास में बुनियादी भूमिका निभाती हैं। शिक्षित बेटियां राष्ट्र की मूल्यवान पूंजी और उज्ज्वल भविष्य की गारंटी हैं।

बैठक के अंत में हुज्जतुल-इस्लाम शेख़ क़ैस ताई ने भारतीय छात्राओं के लिए दुआ-ए-ख़ैर की। इस अवसर पर छात्राओं की इल्मी और नैतिक तरबीयत, महिलाओं की शिक्षा तथा समाज के सुधार में उनकी प्रभावी भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया गया।

टैग्स

आपकी टिप्पणी

You are replying to: .
captcha