सोमवार 12 अक्टूबर 2026 - 16:47
क्या इराक से अमेरिकी सेना की वापसी वास्तव में पूरी होगी?

हौज़ा / इराक से अमेरिकी सेना की वापसी के समझौते पर अमल को लेकर संदेह जताए जा रहे हैं। इराक के राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका वास्तव में अपनी सेना को इराक से वापस बुला लेगा या किसी नए तरीके से वहां अपना प्रभाव दोबारा स्थापित करने की कोशिश करेगा।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार , इराक से अमेरिकी सेना की वापसी के समझौते पर अमल को लेकर संदेह जताए जा रहे हैं। इराक के राजनीतिक हलकों में यह सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका वास्तव में अपनी सेना को इराक से वापस बुला लेगा या किसी नए तरीके से वहां अपना प्रभाव दोबारा स्थापित करने की कोशिश करेगा।

इराक और अमेरिका के बीच सैन्य वापसी के समझौते के बावजूद, दोनों देशों के भविष्य के संबंधों और इराक में अमेरिकी मौजूदगी को लेकर कई सवाल बने हुए हैं।

इराक के केंद्र ‘अल-क़िम्मा’ के प्रमुख हैदर अल-मूसवी ने इस संबंध में कहा कि अमेरिका के साथ इराक के लंबे अनुभव के कारण उसके वादों पर आसानी से भरोसा नहीं किया जा सकता। उन्होंने याद दिलाया कि अमेरिकी सेना वर्ष 2011 में इराक से वापस चली गई थी, लेकिन बाद में आईएसआईएस (दाइश) के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर फिर से इराक में दाखिल हो गई।

उन्होंने कहा कि भौगोलिक दृष्टि से इराक बेहद महत्वपूर्ण स्थान पर स्थित है। इस क्षेत्र में प्रभाव रखने वाला देश पूरे मध्य पूर्व के हालात को प्रभावित कर सकता है। अमेरिका भी इराक की इस रणनीतिक अहमियत से अच्छी तरह परिचित है। यही वजह है कि इराक क्षेत्रीय और वैश्विक शक्तियों के ध्यान का केंद्र बना हुआ है।

हैदर अल-मूसवी के अनुसार, अमेरिका ने अपनी मर्जी से इराक से सेना वापस बुलाने का फैसला नहीं किया, बल्कि प्रतिरोध, उससे जुड़े लोगों के बलिदान और अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर बढ़ते दबाव के कारण उसे सेना की वापसी के लिए मजबूर होना पड़ा।

उन्होंने आगे कहा कि प्रतिरोध ने इराक की राजनीतिक शक्तियों पर भी दबाव बनाया, ताकि वे देश से सभी विदेशी सैनिकों की पूर्ण वापसी सुनिश्चित करने वाले समझौते तक जल्द पहुंच सकें।

हैदर अलमूसवी ने जोर देकर कहा कि अमेरिकी सेना की वापसी के विभिन्न चरणों पर लगातार नजर रखना ज़रूरी है, ताकि समझौते को लागू कराया जा सके और इराक की संप्रभुता तथा स्वतंत्र रूप से फैसले लेने के अधिकार की रक्षा हो सके।

दूसरी ओर, अमेरिकी अधिकारियों ने समाचार पत्र द वॉशिंगटन पोस्ट को बताया है कि इराक में बचे अंतिम अमेरिकी सैनिकों को जॉर्डन स्थानांतरित कर दिया गया है। जॉर्डन में क्षेत्रीय मिशन का मुख्य कमान मुख्यालय स्थित है, जो दाइश के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर चलाया जा रहा है।

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