हौज़ा / इतिहास में जनाज़े की तशयीअ सिर्फ किसी मरने वाले के लिए आखरी रस्म नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा ताक़तवर सामाजिक, मज़हबी और सच्ची स्यासी मानवीय इज़हार है जो तहजीबों के तरक्की में अहेम भूमिका…