8 रबीउल अव्वल इमाम हुसैन (अ) की अज़ादारी का आख़िरी दिन है। यह केवल शोक समाप्त होने का दिन नहीं, बल्कि अपनी अज़ादारी और पूरे मुहर्रम का जायज़ा लेने का भी अवसर है कि हमने क्या खोया और क्या पाया?