मस्जिद-ए-मुक़द्दस जमकरान में आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली की इमामत में शहीद रहबर और उनके परिवार के सदस्यों की नमाज़े जनाज़ा केवल एक धार्मिक रस्म नहीं थी, बल्कि तौहीद, ईश्वर-भक्ति और पूर्ण मानव…