हौज़ा / शरीयत इस्लाम में रोज़े से मुराद हैं, अल्लाह तआला की रज़ा और इज़हारे बंदगी के लिए इंसान आज़ान सुबह से मगरिब तक उन चीजों से दूरी अख्तियार करें जो रोज़े को बातिल होने का सबब हो,