अवज्ञा (5)
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दिन की हदीसः
धार्मिकअल्लाह से डर और आशा
इमाम सादिक (अ) ने एक रिवायत में अल्लाह से आशा और अल्लाह से डर के बीच की सीमा की ओर संकेत किया है।
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धार्मिकशरई अहकाम | अम्बिया, आइम्मा और हज़रत ज़हरा (स) के मुबारक नामो को छूने के लिए वुज़ू
हौज़ा/ ईरान की इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने एक सवाल का जवाब दिया कि “कौन से कामों के लिए वज़ू करना चाहिए?”
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धार्मिकशरई अहकाम । क्या ज़ोहर की वुज़ू से मग़रिब और इशा की नमाज़ पढ़ी जा सकती है ?
हौजा / हज़रत आयतुल्लाहिल उज़्मा सय्यद अली ख़ामेनेई ने एक सवाल के जवाब में यह वज़ाहत फ़रमाई है कि किन सूरतों में एक ही वुज़ू से कई फ़र्ज़ नमाज़ें अदा की जा सकती हैं।
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धार्मिकशरई अहकाम । अगर शक हो कि वज़ू है या नही तो क्या हुक्म है?
हौज़ा / हज़रत आयतुल्लाह ख़ामेनई ने वज़ू की आदत होने के बावजूद वजू में शक के बारे में एक सवाल का जवाब दिया है।
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धार्मिकशरई अहकाम । क्या गुस्ल-ए-जुमा के बाद वुजू के बिना नमाज़ पढ़ी जा सकती है?
हौज़ा / गुस्ल-ए-जुमा हालांकि एक मुअक्कद मस्तहब है, लेकिन वुजू का स्थान नहीं ले सकता। इसलिए फर्ज़ नमाज़ या किसी भी ऐसे काम के लिए जिसमें पाकीज़गी की शर्त हो, वुजू ज़रूरी है। केवल गुस्ल-ए-जनाबत…