इमामों द्वारा बताए गए तरीकों के अनुसार शोक मनाना, जिसकी सच्चे और मान्य मरजा-ए-तक़लीद ने भी निरंतर प्रेरणा दी है, वही वास्तविक अज़ादारी कहलाती है। इसके अतिरिक्त जो अज़ादारी की जाए वह भावनात्मक…
हौज़ा / जामिया मुदर्रेसीन हौज़ा ए इल्मिया क़ुम के सरबराह आयतुल्लाह सय्यद हाशिम हुसैनी बुशहरी ने कहा है कि सोशल मीडिया में फैलाए जाने वाले शुबहात और नफ़रत अंगेज़ी का सबसे बेहतर मुक़ाबला यह है…
हौज़ा / आयतुल्लाह मुहम्मद जवाद फ़ाज़िल लंकरानी ने कहा कि आज कुछ लोग, जिन्हें न तो साइंटिफ़िक जानकारी है और न ही कुरान और परंपराओं की सही समझ है, वे यह सवाल उठाते हैं कि मातम की क्या ज़रूरत है?…