ऐसे बौद्धिक रूप से वंचित लोग, जो इतिहास के दौरान पैग़म्बरों के संदेश से महरूम रहे, आख़िरत में दुनिया जैसी एक परीक्षा से गुज़रेंगे। उनके आमाल में केवल उन गुनाहों की सज़ा होगी, जो अक़्ल और फ़ितरत…
मौलाना अमीन हैदर हुसैनी, नायब-ए-इमामे जुमा बनारस की इक्तिदा में जुमे की नमाज़ अदा की गई। उन्होने कहा कि इमाम सज्जाद (अ) ने मोमिन की पाँच निशानियाँ बयान फ़रमाईं; गुनाह से परहेज़, तंगदस्ती में…
हौज़ा / हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लिमीन सैयद शमसुल हसनैन उर्फ तालीब रज़ा ने जुमआ के ख़ुतबे में मौत और आख़िरत की याद को इंसान की इस्लामी ज़िंदगी का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि मौत से कोई व्यक्ति…
हौज़ा / जन्नत के लोग दुनिया की मना की हुई और गुनाह भरी खुशियों से दूर रहते थे, नेकी की ज़िंदगी जीते थे, और कुछ समय की और कुछ पल की खुशियों को पसंद नहीं करते थे। इसका नतीजा हमेशा रहने वाली खुशी,…
हौज़ा / जब फिक्री और अख़्लाक़ी लगज़ीश आम हो चुकी थीं, तो एक रिवायत में हज़रत इमाम हादी (अ.स.) एक बेहद अहम बीमारी की तरफ़ इशारा करते हैं,मुश्किलात को ज़माने से मंसुब करना...... ।