हज़रत आयतुल्लाह सुब्हानी ने आयत-ए-नफ़र के अर्थ की व्याख्या करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि यह आयत हर दौर में सभी मुसलमानों से संबंधित है। उन्होंने मदरसा "दारुल इल्म" को इस आयत का एक उदाहरण बताते…
हौज़ा / मेंहदवियत की विशेषज्ञ ने कहा, धार्मिक दृष्टिकोण में मेंहदवियत, भविष्य के क्षितिज को न्याय की बुनियाद पर और वर्चस्व पर आधारित संरचनाओं की अस्वीकार के साथ तरसीम करती है। वर्तमान दौर में…
हौज़ा/आज की तेज़ रफ़्तार और बिना दिशा वाली दुनिया में, जहाँ दिमागी तूफ़ान, सामाजिक बदलाव और कल्चरल चुनौतियाँ लगातार एक औरत की पर्सनैलिटी को हिलाने की कोशिश कर रही हैं, यह बुनियादी सवाल पूरी तेज़ी…
हौज़ा / हज़रत फ़ातिमा ज़हरा (सलामुल्लाहे अलैहा) एक मिसाली पत्नी के तौर पर तमाम मुसलमान ख़्वातीन के लिए एक कामिल नमूना हैं, जिनकी घरेलू ज़िंदगी मोहब्बत, ईसार और वफ़ादारी से भरी थी।