हक़ीक़ी ईमान दो चरणो में तश्कील पाता है,पहले मरहले में ग़ौर-ओ-फ़िक्र और अक़्ली दलीलों के ज़रिए ईश्वरीय मआरिफ़ को अक़्ल के ज़रिए समझा जाता है, जो ईमान की तमहीद होती है। इसके बाद इन हक़ाइक़ को…