आयतुल्लाह सय्यद अली क़ाज़ी (र) दूसरों के दिल को खुश करने को केवल एक नैतिक कार्य नहीं मानते थे, बल्कि इसे आध्यात्मिक प्रशिक्षण और अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने का साधन मानते थे। उनके प्रशिक्षण…