सोमवार 24 अगस्त 2026 - 05:53
आयतुल्लाह नजाबत की ज़बानी आयतुल्लाह क़ाज़ी का प्रशिक्षण देने का तरीका

आयतुल्लाह सय्यद अली क़ाज़ी (र) दूसरों के दिल को खुश करने को केवल एक नैतिक कार्य नहीं मानते थे, बल्कि इसे आध्यात्मिक प्रशिक्षण और अल्लाह की प्रसन्नता प्राप्त करने का साधन मानते थे। उनके प्रशिक्षण देने के तरीके से जुड़ी एक घटना आयतुल्लाह नजाबत (र) ने बयान की है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, आयतुल्लाह सय्यद अली क़ाज़ी (र) दूसरों के दिल जीतने और उन्हें खुश रखने को आध्यात्मिक प्रशिक्षण का एक साधन मानते थे। उनके प्रशिक्षण देने के तरीके की एक घटना आयतुल्लाह नजाबत (र) ने बयान की है।

आयतुल्लाह नजाबत (र) कहते हैं कि आयतुल्लाह क़ाज़ी (र) के प्रशिक्षण देने के तरीकों में से एक यह था कि वे लोगों के दिल जीतने और उन्हें खुश रखने की कोशिश करते थे। इसकी एक मिसाल यह है कि जब वे नजफ़ अशरफ़ में हमाम जाते थे तो वापस लौटते समय हमाम के उस युवा सेवक को, जो उनके जूते लाकर उनके सामने करीने से रखता था, एक चौथाई दीनार देते थे, जबकि हमाम की सामान्य फीस कुछ फल्स से अधिक नहीं होती थी। यानी वे उस युवक को सामान्य मेहनताने से कई गुना अधिक रकम देते थे।

आयतुल्लाह नजाबत (र) कहते थे कि इसका उद्देश्य यह था कि आयतुल्लाह क़ाज़ी (र) उस युवक का दिल खुश करना चाहते थे। उनके विचार में जब किसी इंसान का दिल खुश होता है तो चूंकि यह दिल अल्लाह से जुड़ा हुआ है, इसलिए उसे खुश करने का प्रभाव इंसान के अपने आध्यात्मिक जीवन पर भी पड़ता है।

आयतुल्लाह क़ाज़ी ((र) इस कार्य के माध्यम से दूसरों को भी यह शिक्षा देते थे कि किसी इंसान का दिल खुश करो, क्योंकि यह दिल अल्लाह से जुड़ा हुआ है। इस कार्य का आध्यात्मिक लाभ स्वयं तुम्हें भी प्राप्त होगा।

स्रोत: ज़िक्रुस्सालिहीन, पेज 168

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