यह सवाल सिर्फ़ एक जुमला नहीं, बल्कि हमारे इज्तिमाई ज़मीर से किया जाने वाला एक संजीदा सवाल है। हम आख़िर कहाँ जा रहे हैं? हमारी मंज़िल क्या है? हम किस सिम्त गामज़न हैं? बनाम-ए-अकीदत, बनाम-ए-अज़ादारी…