हौज़ा / इमाम (अ.स.) ने यह कहते हुए अपने कदम पीछे खींच लिए कि मुआविया मैं तुझ से जंग करने से नहीं डरता, लेकिन मेरी नजर मे उम्मत की इस्लाह और नफ़्से मोहतर्मा की जान माल की सुरक्षा है।