हौज़ा / अलीؑ मेरे इमाम हैं और मैं अलीؑ का ग़ुलाम हूँ यह सिर्फ़ शब्दो का संग्रह नहीं है, न ही किसी आरज़ी जज़्बे की बाज़गश्त, बल्कि यह एक ज़िंदा फ़िक्री अहद है, जो इंसान के बातिन में जन्म लेता…
हौज़ा / शायद आपने "ताज पोशी हज़रत महदी (अ)" की व्याख्या भी सुनी होगी! लेकिन क्या यह शब्द विश्वसनीय शिया स्रोतों पर आधारित है या यह केवल एक सैद्धांतिक और गलत व्याख्या है? इसी प्रश्न का उत्तर देने…