इस्तगफ़ार (5)
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उलेमा और मराजा ए इकरामक्या आप जानते हैं कि वे कौन से कार्य हैं जो तीर की तरह इमाम-ए-ज़माना (अ) के दिल को घायल कर देते हैं?
मनुष्य अक्सर गुनाह को सिर्फ अपने और अल्लाह के बीच एक निजी मामला समझ लेता है, जबकि कुछ ऐसे कार्य भी होते हैं जो इमाम-ए-ज़माना (अ.ज.) के पाक दिल को गहरा दुख पहुँचाते हैं और उनकी रूह को आहत कर देते…
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धार्मिकहज़रत इमाम हादी अ.स. का दौर और उम्मत की रहनुमाई
हौज़ा / जब फिक्री और अख़्लाक़ी लगज़ीश आम हो चुकी थीं, तो एक रिवायत में हज़रत इमाम हादी (अ.स.) एक बेहद अहम बीमारी की तरफ़ इशारा करते हैं,मुश्किलात को ज़माने से मंसुब करना...... ।
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ईरानमाहे रजब में सबसे अफ़ज़ल अमल क्या है? सुप्रीम लीडर की अहम हिदायतें
हौज़ा / माह ए मुबारक रजब अल्लाह तआला की तरफ़ रुजू, दुआ, तवस्सुल और ख़ास तौर पर इस्तिग़फ़ार का महीना है।रहबर-ए-इंक़ेलाब-ए-इस्लामी के मुताबिक़ इस बरकत वाले महीने में सबसे ज़्यादा शायस्ता और अफ़ज़ल…
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उलेमा और मराजा ए इकरामरजब एक ऐसा मुक़द्दस महीना है जिसके हर दिन का अलग-अलग सवाब है
हौज़ा/इस्लामिक रिवायतो के अनुसार, रजब का महीना एक खास और नेक महीना है जो इबादत, दुआ, माफ़ी मांगने और रूहानी कामों से भरा होता है, और यह इंसान का अल्लाह और उसके संतों के साथ रिश्ता मज़बूत करता…