हौज़ा / कुछ ग़लत नज़रिए, जो औरतों से मख़सूस नहीं हैं, मर्द भी कभी कभी उन्हीं मतों का पालन करते हैं और यह कहना चाहते हैं कि आइये इस तराज़ू (के पलड़ों) की चीज़ें (मर्द और औरत के रोल) आपस में बदल…
हौज़ा / इस्लाम ने घर के भीतर औरत के किरदार को जो इस क़द्र अहमियत दी है उसका कारण यही है कि औरत में अगर फ़ैमिली से लगाव हो, अपनी दिलचस्पी ज़ाहिर करे, बच्चों की तरबियत को अहमियत दे इस से समाज में…
हौज़ा / अगर इंसानों को आज़ाद छोड़ दिया जाए ताकि वे अपनी यौन इच्छा को जिस तरह चाहें पूरा करें तो ऐसे में या तो परिवार का गठन न हो पाता और वह बेजान होता या उसके सामने हर पल तबाह होने का ख़तरा मंडराता…