शहीद उस्ताद मुर्तज़ा मुतहरी ने रसूले अकरम (स) की एक दुआ का उल्लेख करते हुए कहा है कि आप बंदगी के सर्वोच्च मक़ाम पर आसीन होने के बावजूद अल्लाह तआला से दुआ करते थे कि वह एक क्षण के लिए भी उन्हें…