करामत हुसैन (9)
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धार्मिकअगर युद्ध अपने अंतिम और सबसे खतरनाक चरण तक पहुँच जाए!
युद्धों का फैसला हमेशा युद्धभूमि में नहीं होता। कई बार असली मुकाबला इस बात का होता है कि कौन-सा देश अपनी अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढाँचे, ऊर्जा, संचार व्यवस्था और राष्ट्रीय मनोबल को अधिक समय तक…
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धार्मिकख़िताबत का मापदंड!
ख़िताबत केवल बोलने का नाम नहीं, बल्कि दिलों को जगाने की कला है। एक खतीब की महानता उसकी ऊँची आवाज़ से नहीं आँकी जाती, बल्कि इस बात से कि उसके शब्द श्रोताओं के दिल और दिमाग़ में कितनी गहराई से…
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धार्मिकला तम्हू ज़िक्रना…; तुम हमारा ज़िक्र कभी मिटा नहीं सकोगे!
इतिहास में दर्ज कुछ वाक्य केवल शब्द नहीं होते, वे युगों का निर्णय बन जाते हैं। वे किसी एक सभा के लिए नहीं कहे जाते, बल्कि आने वाली सदियों के विवेक को जगाने के लिए बोले जाते हैं। शाम (सीरिया)…
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धार्मिकराहे हक़ का मुजाहिद, इमाम रज़ा (अ) की शरण में
आज पवित्र मशहद का वातावरण शोकमय है। लाखों आँखें नम हैं और हजारों दिल दुःख से बोझिल हैं। हज़रत इमाम अली इब्न मूसा अर-रज़ा (अ.) के पवित्र रौज़े की रहमत भरी छाया में एक ऐसे मुजाहिद को सुपुर्द-ए-ख़ाक…
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धार्मिकशाम-ए-ग़रीबाँ; वह दुखभरी रात जिस पर आसमान भी रो पड़ा
शाम-ए-ग़रीबाँ केवल हमें रुलाने के लिए नहीं आती, बल्कि यह बताने आती है कि सत्य के मार्ग में बलिदान की अंतिम मंज़िल क्या होती है, सब्र की मेराज क्या होती है, और अत्याचार सहने की वह अवस्था क्या…
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धार्मिकअरब की ज़मीन: और दुनिया की ताकतों का अड्डा
दुनिया के इतिहास की स्टडी से हमें बार-बार एहसास होता है कि कुछ इलाके सिर्फ़ ज्योग्राफिकल बाउंड्री नहीं हैं, बल्कि दुनिया की पॉलिटिक्स के मुश्किल मैदान बन गए हैं। मिडिल ईस्ट भी ऐसा ही एक इलाका…
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धार्मिकनिसंदेङ, झूठ खत्म होने वाला ही है!
हौज़ा / इंसानी इतिहास का एक पक्का उसूल है कि झूठ कुछ समय के लिए शोर मचा सकता है, लेकिन वह कमज़ोर, खोखला और आखिर में अपनी फितरत में हार जाता है। कुरान की यह घोषणा केवल एक नैतिक सलाह नहीं है, बल्कि…
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धार्मिकक्या जनाबे फिज़्ज़ा सबसे पहले जन्नत जाएंगी?
हौज़ा/ यह सवाल देखने में छोटा लगता है, लेकिन असल में यह एक बड़ी फ़िक्री गलती और भटकाव की ओर इशारा करता है। समस्या सिर्फ़ उस मिम्बरी अफ़साने में सबूतों की कमी नहीं है, बल्कि वह सोच भी है जिसने…
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मरहूम डॉ. सय्यद कल्बे सादिक की पांचवीं बरसी;
धार्मिकमौलाना डॉ. सय्यद कल्बे सादिक; अहदे बेदारी का रौशन मीनार
हौज़ा/ मौलाना डॉ. सैयद कल्बे सादिक नक़वी कोई एक इंसान नहीं, बल्कि एक पूरा दौर थे; अहदे बेदारी, ज्ञान का दौर, किरदार का दौर और प्यार का दौर, वे एक सुधारक, एक टीचर, एक उपदेशक, एक कानून के जानकार…