हौज़ा/इमामत का पाँचवाँ चाँद और इस्मत का सातवाँ सूरज, यानी हज़रत इमाम मुहम्मद बाकिर (अ), जिनकी पवित्र ज़िंदगी मानी जाती है, वे साल 57 हिजरी में इस दुनिया में आए। यह एक उथल-पुथल वाला दौर था जब…
हौज़ा/ जब दोनो दुनियाओं के बनाने वाले ने हज़रत इंसान को जेवर ए वुजूद से सुशोभित किया तो उसकी खिलक़त का पूर्ण विवरण पिता के सुल्ब से माँ के गर्भ तक और माँ के गर्भ की सभी स्थितियो को क़ुरआन करीम…
हौज़ा/ दुनिया के सभी फ़ुक़्हा एक इमाम का इंतज़ार कर रहे हैं, और कर्बला का फ़क़ीह इतना भरोसेमंद है कि उस समय के तीन तीन इमाम और मासूम उसका इंतज़ार कर रहे हैं।