इमाम हुसैन (अ) की ज़ियारत और उन पर सलाम भेजने की अहमयत इतना अधिक है कि उसे न बयान के दायरे में समेटा जा सकता है और न ही कलम उसे लिखने की ताकत रखता है। चाहे तुम उनकी कब्र के पास हो या दूर, तुम्हारा…
हौज़ा / इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने एक रिवायत में इमाम हुसैन (अ) की क़ब्र की ज़ियारत तर्क करने के ख़िलाफ़ खबरदार किया है।