हौज़ा / इमाम ख़ुमैनी र.ह. ने फरमाया,इस ईद को ज़िंदा रखना इस लिए नहीं है कि चिराग़ानी की जाए, क़सीदे पढ़े जाएं, महफ़िलें की जाएं, यह चीज़ें अच्छी हैं लेकिन असली बात यह हैं कि हम सब उनके नक़्शे…