हज़रत आयतुल्लाह सुब्हानी ने आयत-ए-नफ़र के अर्थ की व्याख्या करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि यह आयत हर दौर में सभी मुसलमानों से संबंधित है। उन्होंने मदरसा "दारुल इल्म" को इस आयत का एक उदाहरण बताते…