आज ज़रूरत नारों की नहीं, बल्कि उसूलों को फिर से कायम करने की है। ज़रूरत इमोशनल जोश की नहीं, बल्कि नैतिक हिम्मत की है। और सबसे बढ़कर, ज़रूरत इस बात की है कि हम अपनी गलतियों की भी उसी तरह बुराई…