फ़िरऔन के आखिरी लम्हों में न बचने के दो मुख्य कारण हैं: पहला, ईमान लाने का गलत समय (अज़ाब देखने के बाद), और दूसरा, हज़रत मूसा (अ) से मदद माँगना, जबकि सीधे अल्लाह से मदद नहीं माँगी।