सोमवार 20 अप्रैल 2026 - 15:08
फ़िरऔन के ईमान लाने के बावजूद डूबने का क्या कारण था?

फ़िरऔन के आखिरी लम्हों में न बचने के दो मुख्य कारण हैं: पहला, ईमान लाने का गलत समय (अज़ाब देखने के बाद), और दूसरा, हज़रत मूसा (अ) से मदद माँगना, जबकि सीधे अल्लाह से मदद नहीं माँगी।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, इस लेख में 'ऐलल उश शराए' नामक पुस्तक से एक हदीस के माध्यम से फ़िरऔन के डूबने की वजह के बारे में बताया जाएगा, हालाँकि वह आखिरी वक्त में ईमान ले आया था।

हमदान बिन सुलेमान अल-नैशाबूरी का कहना है कि इब्राहीम बिन मुहम्मद अल-हमदानी ने हमें बताया कि उन्होंने कहा:
मैंने हज़रत अबिल हसन अली बिन मूसा अल-रज़ा (अ) की सेवा में अर्ज़ किया: किस वजह से अल्लाह ने फ़िरऔन को डुबो दिया, हालाँकि उसने अल्लाह पर ईमान लाया था और उसकी एकता का इक़रार किया था?

इमाम (अ) ने फरमाया:
वह अज़ाब को देखने के बाद ईमान लाया, और ऐसा ईमान क़बूल नहीं किया जाता। यह अल्लाह का फैसला है जो पिछली और आने वाली सभी उम्मतों पर लागू है। अल्लाह फ़रमाता है: فَلَمَّا رَأَوْا بَأْسَنا قالُوا آمَنَّا بِاللَّهِ وَحْدَهُ وَ کَفَرْنا بِما کُنَّا بِهِ مُشْرِکِینَ فَلَمْ یَکُ یَنْفَعُهُمْ إِیمانُهُمْ لَمَّا رَأَوْا بَأْسَنا "फिर जब उन्होंने हमारी यातना देखी तो कहने लगे: हम अकेले अल्लाह पर ईमान लाए और उन चीजों को नहीं मानते जिन्हें हम उसका शरीक बना रहे थे। परन्तु उनका ईमान उनके किसी काम नहीं आया, जब उन्होंने हमारी यातना देख ली।" (सूर ए ग़ाफ़िर, आयत 84-85)
और अल्लाह फरमाता है:یَوْمَ یَأْتِی بَعْضُ آیاتِ رَبِّکَ لا یَنْفَعُ نَفْساً إِیمانُها لَمْ تَکُنْ آمَنَتْ مِنْ قَبْلُ أَوْ کَسَبَتْ فِی إِیمانِها خَیْراً "जिस दिन तुम्हारे रब की कुछ निशानियाँ आएँगी, तो किसी ऐसे व्यक्ति को उसका ईमान लाभ नहीं देगा जो पहले से ईमान नहीं लाया हो या अपने ईमान में कोई भलाई नहीं कमाई हो।" (सूर ए अनआम, आयत 158)

और इसी तरह फ़िरऔन, जब उसे डूबने का यकीन हो गया तो बोला: آمَنْتُ أَنَّهُ لا إِلهَ إِلَّا الَّذِی آمَنَتْ بِهِ بَنُوا إِسْرائِیلَ وَ أَنَا مِنَ الْمُسْلِمِینَ "मैं ईमान लाया कि उसके सिवा कोई पूज्य नहीं जिस पर बनी इसराईल ईमान लाए, और मैं भी उसके आज्ञाकारियों में से हूँ।"
उससे कहा गया: "अब (ईमान लाता है?) हालाँकि इससे पहले तू नाफरमानी करता रहा और मुल्क में फसाद फैलाने वालों में से था। आज हम तेरे शरीर (बदन) को (समुद्र से) बचाकर ऊँची जगह पर डाल देंगे ताकि तू अपने बाद वालों के लिए एक निशानी बन जाए।"

इमाम (अ) ने आगे बताया:
फ़िरऔन सिर से पैर तक लोहे के कवच में था। जब वह डूब गया तो अल्लाह ने उसके बदन को पानी से निकालकर ज़मीन की एक ऊँची जगह पर डाल दिया ताकि बाद वालों के लिए निशानी हो। लोग देखें कि लोहे के भारी कवच के बावजूद वह ऊँची जगह पर कैसे आ गया, जबकि भारी चीज़ का तो पानी में डूब जाना चाहिए था, ऊपर नहीं आना चाहिए था। यह एक चमत्कार और निशानी थी।

इसके अलावा दूसरी वजह:
इमाम (अ) ने फरमाया: फ़िरऔन के डूबने की एक और वजह यह थी कि जब वह डूबने लगा तो उसने हज़रत मूसा (अ) को पुकारा उनसे मदद माँगी, अल्लाह से सीधे मदद नहीं माँगी। तो अल्लाह ने मूसा (अ) की तरफ वही भेजी: "ऐ मूसा, फ़िरऔन को पनाह मत देना, क्योंकि तूने उसे पैदा नहीं किया है। अगर उसने मुझसे पनाह माँगी होती तो मैं उसकी मदद ज़रूर करता।"

स्रोत: ऐलल उश शराए, भाग 1, पृष्ठ 59

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