वह गुलिस्ताँ जो कभी फूलों से महकता था, आज ख़ून की सुर्ख़ी में डूबा हुआ दिखाई देता है। अम्न का पैग़ाम, इस्तिक़ामत का जज़्बा, मज़लूमों की आवाज़ और उम्मत की ढाल, सब एक ऐसी अज़ीम शख़्सियत से वाबस्ता…