पैग़म्बरे अकरम (स) ने एक हदीस में सलाम करने के जीवन में भलाई और बरकत बढ़ाने वाले प्रभाव की ओर इशारा किया है।
मौलाना तनवीरुल हसन, इमाम-ए-जुमा गाज़ीपुर ने जुमे के ख़ुत्बे में सूरह-ए-अहज़ाब की आयत 21 का हवाला देते हुए कहा कि परवरदिगार-ए-आलम ने रसूल-ए-अकरम (स) की ज़िंदगी को तमाम इंसानों के लिए बेहतरीन नमूना-ए-अम…
पैग़म्बर-ए-अकरम (स) ने एक रिवायत मे शिक्षकों और अध्यापकों के हक में इस प्रकार दुआ की है।
इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) एक रिवायत में उस घर की बरकत और खास इज्ज़त बताते हैं जिसमें कुरआन पढ़ा जाता है।