हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, यह रिवायत “बिहार अल-अनवार” किताब से ली गई है। इस रिवायत का पाठ इस तरह है:
قال الامام الصادق علیہ السلام:
اِنَّ البَيْتَ اِذا كانَ فيهِ المُسْلِمُ يَتْلوُ القُرْآنَ يَتَراءاهُ أَهْلُ السَماءِ كَما يَتَراءى أَهْلُ الدُّنيا اَلْكَوْكَبَ الدُرِّىَّ فى السَّماءِ.
हज़रत इमाम जाफ़र सादिक़ (अ) ने फ़रमाया:
जब कोई मुसलमान घर में कुरआन पढ़ता है, तो आसमान वाले उस घर को ऐसे देखते हैं जैसे दुनिया वाले आसमान में चमकता हुआ तारा देखते हैं।
बिहार उल अनवार, भाग 92, पेज 200
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