कमज़ोर और भयभीत मुसलमान न केवल क़ुरआन की दृष्टि में कोई विशेष स्थान नहीं रखता, बल्कि वह उस मूल "सत्कर्म" (अमल-ए-सालेह) की भी उपेक्षा करता है, जिसे क़ुरआन सत्य के विरोधियों को क्रोधित करने वाला…