मारफते नफ्स (8)
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उलेमा और मराजा ए इकरामदुआ 'अल्लाहुम्मा अर्रिफ़नी नफ़्सक,ख़ुदा, रसूल (स) और इमाम (अ) की मारफ़त का सबसे उत्तम ज़रिया है: आयतुल्लाह जवादी आमोली
आयतुल्लाहिल उज़्मा जवादी आमोली ने कहा है कि ग़ैबत के दौर में सबसे महत्वपूर्ण और बरकत वाली दुआ «اअल्लाह जुम्मा अर्रिफ़नी नफ़्सक» है, क्योंकि यह केवल सवाब की दुआ नहीं है, बल्कि ख़ुदा, रिसालत और…
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भारतईमान मात्र दावा नहीं, बल्कि ज्ञान, मारफत, कर्म और अखलाक का समग्र तंत्र है: आगा सय्यद हसन मूसवी सफवी
अंजुमन ए शरई शियान ए जम्मू-कश्मीर के अध्यक्ष, हुज्जतुल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन आगा सय्यद हसन मूसवी सफवी ने केंद्रीय इमामबाड़ा बडगाम में जुमा के खुत्बे से खिताब करते हुए कहा कि इस्लाम में ईमान केवल…
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धार्मिकइमाम हुसैन अलैहिस्सलाम इंसानियत के अज़ीम इन्क़िलाबी रहनुमा
तारीख़ में बहुत से लोगों ने हालात बदलने की कोशिश की, लेकिन वाक़ए कर्बला और इमाम हुसैन (अ) का नाम वह इकलौती मिसाल है जिसने हर दौर के मज़लूमों और सच्चे लोगों को रास्ता दिखाया है। इमाम हुसैन (अ)…
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भारतजन्नतुल बक़ीअ का विध्वंस दुश्मनों की सबसे बड़ी साज़िश, मौलाना महबूब मेहदी आबिदी / सच्चा मौलवी मैदान-ए-अमल में दिखाई देता है: मौलाना असलम रिज़वी
अल-बक़ीअ ऑर्गनाइज़ेशन शिकागो, अमेरिका की ओर से हज़रत इमाम ज़ैनुल आबेदीन अलैहिस्सलाम की दर्दनाक शहादत के अवसर पर ज़ूम के माध्यम से एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया।
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धार्मिकइमाम ज़माना की मारफ़त: ऐतराज़ और हमारी ज़िम्मेदारियां
मारफ़त, इंसान को बनाने का एक हिस्सा है। जब इंसान को बनाया गया, तो उसे कुदरत पर बनाया गया। अब सवाल यह उठता है कि उसे किस कुदरत पर बनाया गया, एकेश्वरवाद की कुदरत पर या ज्ञान पाने की कुदरत पर?
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गैलरीवीडियो / अल्हम्दुलिल्लाह, इस देशद्रोह को खत्म करना ईरानी राष्ट्र का काम हैःसर्वोच्च नेता
हौज़ा / इस्लामी क्रांति के सुप्रीम लीडर ने हालिया दंगो और ईरान की मौजूदा स्थिति से संबंधित अपने भाषण मे कहा कि अल्हम्दुलिल्लाह, इस देशद्रोह को खत्म करना ईरानी राष्ट्र का काम है।
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ईरानलोजिकली विरोध करना जनता का जायज़ अधिकार है लेकिन विरोध, फ़ितना और फ़साद मे अंतर है
हौज़ा /हौज़ा ए इल्मिया ख़ुरासान के अध्यापक ने कहाः ऐतराज़ और फ़ितना व फ़साद मे अंतर है। जायज़ ऐतराज़ ना यह कि केवल सही है बल्कि किसी समाज की बेहतरी का कारण भी बनता है।
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धार्मिकबहलोल के अजीब सबक
हौज़ा / शेख जुनैद बग़दादी जो एक प्रसिद्ध सूफ़ी ज्ञानी थे, जब बहलोल से मिले, तो उन्होंने महसूस किया कि अपने खाने-पीने, बात करने और सोने के बाहरी आचारों का पालन करना असली मकसद के बिना नाकाफी है।…