शुक्रवार 9 जनवरी 2026 - 17:45
लोजिकली विरोध करना जनता का जायज़ अधिकार है लेकिन विरोध, फ़ितना और फ़साद मे अंतर है

हौज़ा /हौज़ा ए इल्मिया ख़ुरासान के अध्यापक ने कहाः ऐतराज़ और फ़ितना व फ़साद मे अंतर है। जायज़ ऐतराज़ ना यह कि केवल सही है बल्कि किसी समाज की बेहतरी का कारण भी बनता है।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, हौज़ा ए इल्मिया ख़ुरासान के अध्यापक हुज्जतुल इस्लाम वल मुस्लेमीन नवाई ने कहाः वर्तमान हालात और मुद्दो के मुकाबिल मे हौज़ा ए इल्मिया की ज़िम्मेदारी अधिक गंभीर है।

उन्होने आगे कहाः समाज विशेषरूप से युवा पीढ़ी को क्रांति का महत्व और अज़मत से परिचित करने की आवश्यकता है ताकि उन्हे पता हो कि इस इस्लामी प्रणाली और मौजूदा नेअमतो की प्राप्ति के लिए कितने महत्वपूर्ण बलिदान दिए गए है।

हौज़ा ए इल्मिया ख़ुरासान के अध्यापक ने कहाः हौज़ा ए  इल्मिया की एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी लोगो के मार्गदर्शन का प्रबंध करना है चाहे वह आम सतह पर हो या लोजिकल और जायज़ मोअतरिज़ लोगो की सूरत मे हो ताकि उन लोगो के सही ऐतराजॉात को सुना जाए और उसे संबंधित आदेश तक पहुचाते हुए उसका बेहतरीन समाधान निकाला जाए। 

उन्होने आगे कहाः जनता को भी होशयार रहना चाहिए और इन फ़सादात से अपना रास्ता अलग करना चाहिए और पर्दे के पीछे दुश्मन और उनके मोहर्रेकात के षडयंत्रो को सफल नही होने देना चाहिए।

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