इमाम अली (अ) ने मुआविया को लिखे अपने पहले पत्र में, पिछले ख़ुलफ़ा के तरीक़े के अनुसार अपनी ख़िलाफ़त की घोषणा करते हुए, उससे अपनी बैअत लेने और शाम (सीरिया) को अब्दुल्लाह बिन अब्बास के हवाले करने…
हौज़ा / एक दिन हज़रत इमाम हसन अ.स. घोड़े पर सवार हो कर कही जा रहे थे कि शाम अर्थात मौजूदा सीरिया का रहने वाला एक इंसान रास्ते में मिला। उस आदमी ने इमाम हसन को बुरा भला कहा और गाली देना शुरू कर…
हौज़ा / 28 रजब को इमाम हुसैन अ.स. ने मदीने से हिजरत की, और पूरी दुनिया वालों के लिए इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम का खुला संदेश था यज़ीद की बैय्यत से इनकार और दीने खुदा की सुरक्षा करना।