हौज़ा/इमाम ख़ुमैनी (र.ह.) ने इस अज़ीम हुनरमंदी का मुज़ाहिरा किया और यह अज़ीम कारनामा अंजाम दिया कि समाज के अफ़राद को और ख़ास तौर पर नौजवानों को मैदान में उतारा और इन्हें मैदान में बाक़ी रखा।